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Puraanic contexts of words like Utkala, Uttanka, Uttama, Uttara etc. are given here.

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उत्कुर वायु ६७.६७ ( हिरण्याक्ष के पांच पुत्रों में से एक )

 

उत्केश वामन ५७.६४ ( इन्द्र द्वारा स्कन्द को प्रदत्त गण का नाम )

 

उत्क्रमण लक्ष्मीनारायण २.२५७.१ (देह के विभिन्न अङ्गों से आत्मा के विनिष्क्रमण पर विभिन्न लोकों में गमन का वर्णन ) 

 

उत्तङ्क देवीभाग १.३.३१ ( २१ वें द्वापर में व्यास ) , २.११.५२ ( जनमेजय के सर्प सत्र में होता ) , नारद १.३७.२७ ( गुलिक व्याध द्वारा उत्तङ्क ब्राह्मण की हत्या की चेष्टा पर उत्तंक द्वारा व्याध को उपदेश , व्याध को आत्मबोध प्राप्ति व उत्तङ्क की मुक्ति का वृत्तान्त ) , ब्रह्माण्ड २.३.६३.३४ ( बालुका समुद्र में स्थित मधु राक्षस - पुत्र धुन्धु के वध हेतु उत्तंक ऋषि का राजा बृहदश्व से अनुरोध करना , बृहदश्व - पुत्र कुवलयाश्व द्वारा धुन्धु का वध ) , वायु ६८.३१/ २.७.३१ ( उत्तङ्क के अनुरोध पर कुवलाश्व द्वारा अरूरु - पुत्र धुन्धु के वध का उल्लेख ) , ८८.३३/ २.२६.३३ ( उत्तंक के अनुरोध पर कुवलयाश्व द्वारा मनु? - पुत्र धुन्धु के वध का वर्णन ) , वा.रामायण ०.४ ( उत्तङ्क से रामायण श्रवण से कलिक व्याध की मुक्ति का वर्णन ) , विष्णु ४.२.४० ( उदक ऋषि के अनुरोध पर कुवलयाश्व द्वारा दुन्दु असुर के वध का उल्लेख ) , विष्णु धर्मोत्तर १.१६ ( उत्तङ्क द्वारा तप से विष्णु से यथेच्छ जल प्राप्ति का वर प्राप्त करना , मधु व कैटभ - पुत्र धुन्धु के निग्रह का वृत्तान्त ) , स्कन्द ३.१.१६.१८+ ( उदंक : कक्षीवान - गुरु उदंक द्वारा कक्षीवान को विवाह हेतु अगस्त्य तीर्थ में जाने का परामर्श आदि ) , ७.१.७७ ( उत्तङ्केश्वर लिङ्ग का संक्षिप्त माहात्म्य : किल्बिषों से मुक्ति ) , ७.३.२.५५ ( गौतम - शिष्य उत्तङ्क द्वारा मदयन्ती से प्राप्त कुण्डलों का तक्षक द्वारा हरण , तक्षक नाग से कुण्डलों की प्राप्ति के लिए उत्तङ्क द्वारा पाताल में विवर खोदना तथा उसके पश्चात् वसिष्ठ ऋषि की कामदुघा गौ के उस विवर में गिरने व सरस्वती आदि नदियों द्वारा उस विवर को पूरित करने का वृत्तान्त ) , हरिवंश १.११.२७ ( उत्तङ्क द्वारा मधु असुर - पुत्र धुन्धु के वध हेतु राजा बृहदश्व से अनुरोध आदि ) , लक्ष्मीनारायण १.१७४.१८१( दक्ष यज्ञ से बहिर्गमन करने वाले शैव ऋषियों में से एक ), १.५५१.६४ ( उत्तङ्क द्वारा मदयन्ती से कुण्डल प्राप्ति की कथा ) , ३.९४.६७ ( धुन्धु असुर के वध हेतु उत्तङ्क द्वारा राजा बृहदश्व से अनुरोध ) , कथासरित् १२.७.३०५ ( राजा भीमभट द्वारा उत्तङ्क के तिरस्कार पर उत्तङ्क द्वारा राजा को हाथी बनने का शाप , शाप मुक्ति उपाय कथन )  Uttanka

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उत्तम गरुड १.८७.९ ( उत्तम मनु के पुत्रों के नाम ;उत्तम मन्वन्तर के ५ देवगणों , इन्द्र व दानव आदि के नाम ) ,देवीभाग १.३.३१ ( २१ वें द्वापर में व्यास ) , ३.६.३६ ( भारतवर्ष के जनपदों में से एक ) , ५.१७.२३ ( उत्तानपाद - पुत्र व ध्रुव - अनुज उत्तम द्वारा स्वभार्या को वन में त्यागने का उल्लेख ) , ८.४.८( प्रियव्रत व अपास्या के तीन पुत्रों में से एक  ) , १०.८.१३ ( प्रियव्रत - पुत्र उत्तम मनु द्वारा गङ्गा तट पर देवी आराधना से सुख प्राप्त करने का कथन ) , पद्म ६.२१६.७ ( उत्तमा : देवदास - पत्नी , अङ्गद व वलया - माता ) , ब्रह्म १.२५.६० ( उत्तमार्ण : विन्ध्य निवासियों के जनपदों में से एक ) , ब्रह्माण्ड १.२.१९.३६ ( शाल्मलि द्वीप के सात पर्वतों में से एक ) , १.२.१९.४४( उत्तम पर्वत के लोहित वर्ष का उल्लेख ), १.२.२४.६२( सूर्य का वायु के उत्तम मार्ग का आश्रय लेकर अपने तेज से सारे जगत का तापन करने का कथन ) , १.२.३५.१२२ ( २१ वें द्वापर में व्यास का नाम ) , १.२.३६.२५ ( तृतीय उत्तम मन्वन्तर में देवों के पांच गणों में से प्रत्येक में देवता के नाम , इन्द्र , सप्तर्षियों व उत्तम मनु के पुत्रों के नामों का कथन ) , १.२.३७.१५ ( उत्तम मनु का पृथिवी दोहन में वत्स बनना ) , २.३.४.२९ ( उत्तम मन्वन्तर में सत्य देवगणों के सत्य नाम प्राप्ति का कारण कथन : उत्तम मनु व सत्या - पुत्र आदि ) , ३.४.१.५९ ( उत्तमक : १२ मरीचि नामक देवगण में से एक ) , भागवत ४.८.९ ( उत्तानपाद व सुरुचि - पुत्र , ध्रुव - भ्राता , माता सुरुचि द्वारा ध्रुव को पिता की गोद से वंचित करने की कथा ) , ४.९.२३ ( मृगया काल में उत्तम के नष्ट होने का पूर्व कथन ) , ४.९.४८ ( तप के पश्चात् ध्रुव के गृह आगमन पर उत्तम द्वारा स्वागत वर्णन ) , ४.१०.३ ( मृगया काल में यक्ष द्वारा उत्तम का वध , ध्रुव द्वारा यक्षों से उत्तम के वध का प्रतीकार ) , ५.१.२८ ( राजा प्रियव्रत के तीन मन्वन्तराधिपति पुत्रों में से एक ) , ८.१.२३ ( तृतीय मनु ) , मार्कण्डेय - -/५४५४ ( उत्तमार्ण : विन्ध्य पृष्ठ के निवासियों के जनपदों में से एक ) , ६९+ / ६६+ ( उत्तानपाद व सुरुचि - पुत्र , बहुला - पति , उत्तम द्वारा पत्नी का राज्य से निष्कासन व ब्राह्मण - पत्नी की बलाक राक्षस से रक्षा की कथा , स्व - पत्नी की रसातल में नागराज से पुन: प्राप्ति , नागराज - सुता के वचन से मन्वन्तराधिपति औत्तम पुत्र का जन्म होना , मन्वन्तर वर्णन ) ,- - - -/६९.३७ ( औत्तम मनु के नाम की निरुक्ति ) , - - - /७०.१ ( औत्तम मन्वन्तर के ५ देवगणों , इन्द्र तथा मनु - पुत्रों के नाम ) , वामन ७२.४२ ( उत्तम मन्वन्तर में सात मरुतों की उत्पत्ति की कथा ) , ९०.२७( सरयू में विष्णु की अनुत्तम नाम  से प्रतिष्ठा का उल्लेख ), वायु ६३.१५/२.२.१५ ( उत्तम मन्वन्तर में पृथिवी दोहन हेतु देवभुज द्वारा उत्तम मनु को वत्स बनाने का कथन ), ६७.३६/२.६.३७ ( उत्तम मन्वन्तर में तुषित देवों का उत्तम व सत्या - पुत्र बनने का कथन ) , विष्णु १.११.१+ ( उत्तानपाद - पुत्रों उत्तम व ध्रुव का वृत्तान्त ) , ३.१.१३ ( उत्तम मन्वन्तर के ५ देवगणों , इन्द्र , सप्तर्षियों तथा मनु - पुत्रों आदि के नामों का कथन ) , ३.१.२८ ( चाक्षुष मन्वन्तर के सप्तर्षियों में से एक ), महाभारत द्रोण १०.४० ( पाञ्चालों में उत्तम वीर , उत्तम कर्मा उत्तमौजा का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण ३.१५५.४८ ( औत्तम मनु के जन्म का वृत्तान्त ) , ३.१८०.४८ ( धनग्राम वासी उत्तम विप्र की हरि कृपा से जलोदर रोग से मुक्ति ), द्र. : पुरुषोत्तम  Uttama

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Vedic contexts on Uttama

 

उत्तम - मध्यम - अधम कूर्म २.११.३१ ( प्राणायाम के उत्तम , मध्यम व अधम प्रकारों का कथन : आनन्द से संयोग होने पर उत्तमोत्तम योग होने का कथन ) , गरुड १.४३.१५ ( सूत्र / पवित्र के अङ्गुष्ठ , अङ्गुलियों आदि के मान से उत्तम - मध्यम - अधम होने का कथन ) , १.१७३.३० ( स्नेह , क्वाथ व ओषधि की उत्तम, मध्यम व जघन्य मात्राओं का कथन ), २.२४.१७ (शूद्र के कार्य अनुसार उत्तम , मध्यम या अधम यम लोक में यातना भोगने का कथन ) , गर्ग ४.८.२०( कूप, वापी व तडाग में स्नान के अधम, मध्यम व उत्तम होने का उल्लेख ), देवीभागवत १.६.१२ ( सात्त्विक , राजसिक व तामसिक गुणों के उत्तम , मध्यम व अधम प्रकारों का वर्णन ) , ५.१६.१७ ( महिषासुर द्वारा देवी को उत्तम , मध्यम व अधम प्रकार के संयोगों का वर्णन ) , ७.३५.२१ ( प्राणायाम के उत्तम , मध्यम व अधम प्रकारों का कथन ) , ११.१६.४ ( प्रात: व सायं सन्ध्याओं के उत्तम , मध्यम व अधम प्रकारों का कथन ) , ११.१६.१२ ( सन्ध्या के गृह आदि स्थान अनुसार साधारण , मध्यम व उत्तम भेदों का कथन ), पद्म १.२१.१४५ (दान हेतु सुवर्णाचल की उत्तम , मध्यम व अधम मात्राओं का कथन ) , १.२१.१५१ ( दान हेतु तिलशैल की उत्तम ,मध्यम व कनिष्ठ मात्रों का कथन ), १.२१.१६२ ( दान हेतु घृताचल की उत्तम ,मध्यम व अधम मात्राओं का कथन ) , ६.१३०.५ ( भक्ति के सात्त्विक, राजसिक व तामसिक प्रकारों का वर्णन ), ब्रह्मवैवर्त्त ४.३५.९१ ( श्रीनारायण के चरणों में प्रीति उत्तमा , सत्कर्म मध्यमा तथा परस्त्री सेवन का स्मरण अधमा होने का कथन ) , ब्रह्माण्ड २.३.३४.३८ ( उत्तमा व मध्यमा भक्ति के उद्धव - गोपी आदि उदाहरणों का कथन ) , ३.४.४३.७२ ( तत्त्वचिन्ता उत्तमा, जपचिन्ता मध्यमा व शास्त्रचिन्ता अधमा होने का उल्लेख ), भविष्य ४.८४.३२ ( दान हेतु गुडधेनु के उत्तम ,मध्यम व अधम  भारों का उल्लेख ) , ४.१९५.१३ ( दान हेतु धान्य पर्वत की उत्तम ,मध्यम व कनिष्ठ द्रोण मात्राओं का उल्लेख ) , ४.१९६.२ ( दान हेतु लवणाचल के उत्तम , मध्यम व अधम द्रोण मानों का उल्लेख ) , ४.१९७.२ ( दान हेतु गुड पर्वत के उत्तम ,मध्यम व कनिष्ठ  भारों का उल्लेख ) , ४.१९८.२ ( दान हेतु सुवर्णाचल के उत्तम , मध्यम व अवर पल मानों का उल्लेख ) , ४.१९९.१७ ( तिलाचल के उत्तम , मध्यम व कनिष्ठ द्रोण मानों का उल्लेख ) , ४.२००.४ (कापादसाचल के उत्तम ,मध्यम व जघन्य  भारों का उल्लेख ) , ४.२०१.२ ( घृताचल के उत्तम, मध्यम व अवर कुम्भ मानों का उल्लेख ) , ४.२०२.२ ( रत्नाचल की उत्तम ,मध्यम व अवर संख्या मानों का उल्लेख ) , ४.२०३.२ ( रौप्याचल के उत्तम ,मध्यम व अवर पल मानों का उल्लेख ) , ४.२०४.२ ( शर्कराचल के उत्तम, मध्यम व अधम भार मानों का उल्लेख ) , भागवत ९.१८.४४ ( ययाति - पुत्र पूरु द्वारा पिता को उत्तम ,मध्यम व अधम पुत्र के लक्षणों का कथन ) , मत्स्य ८२.५ ( गुड धेनु के उत्तम, मध्यम व कनिष्ठ  भारों का उल्लेख ) , ८५.२ ( गुड पर्वत के उत्तम ,मध्यम व कनिष्ठ  भारों का उल्लेख ) , ८६.२ ( सुवर्णाचल के उत्तम ,मध्यम व अधम पल मानों का उल्लेख ) , ८७.२ ( तिल शैल के उत्तम, मध्यम व कनिष्ठ द्रोण मानों का उल्लेख ) , ८८.२ ( कार्पासाचल के उत्तम, मध्यम व अधम  भारों का उल्लेख ) , ८९.२ ( घृताचल के उत्तम , मध्यम व अधम कुम्भ मानों का उल्लेख ) , ९०.१ ( रत्नाचल के उत्तम, मध्यम व अधम संख्या मानों का उल्लेख ) , ९१.२ ( रौप्याचल के उत्तम ,मध्यम व अधम पल मानों का उल्लेख ) , ९२.२ ( शर्करा शैल के उत्तम, मध्यम व अधम  भारों का उल्लेख ), ९३.४२ ( उदुत्तमं वरुण इति मन्त्र के अपां मन्त्र होने का उल्लेख ) , २१५.४४ ( राजा द्वारा कर्मों के उत्तम, मध्यम व अधम प्रकारों को जानकर तदनुसार तद् - योग्य पुरुषों का नियोजन करने का निर्देश ) , २७९.४ ( दान हेतु कांचन - निर्मित कामधेनु के उत्तम , मध्यम व कनीयस पल मानों का उल्लेख ) , वा.रामायण ६.६.६ ( रावण द्वारा उत्तम - मध्यम - अधम प्रकार के पुरुषों व मन्त्रों का वर्णन ) , वराह १०२.७ ( गुड धेनु के उत्तम , मध्यम व अधम भार मानों का उल्लेख ) , १०३.२ ( शर्करा धेनु के उत्तम, मध्यम व कनिष्ठ भार मानों का उल्लेख ) , १०९.५ ( कार्पास धेनु के उत्तम , मध्यम व अधम भार मानों का उल्लेख ) , ११०.५ ( व्रीहि धेनु के उत्तम ,मध्यम व अधम द्रोण मानों का उल्लेख ) , १२८.८० ( मणि संख्या या मणि - द्रव्य के अनुसार गणान्तिका / माला के उत्तम , मध्यम व कनिष्ठ प्रकारों का कथन ), वायु १०.७९ / १.१०.७६ ( प्राणायाम के उत्तम ,मध्यम व मन्द प्रकारों का वर्णन ) , ७६.३२ / २.१४.३२ ( उत्तमा द्युति प्राप्ति हेतु पिण्ड को गायों को देने आदि का कथन ) , विष्णुधर्मोत्तर २.२४.४३ ( कर्मों के उत्तम , मध्यम व अधम प्रकारों के अनुसार उत्तम , मध्यम व अधम पुरुषों के विनियोजन का उल्लेख ) , २.७२.११६ ( जघन्य द्वारा उत्तमा के सेवन पर जघन्य के वध आदि का निर्देश ) , ३.३१.१६ ( उत्तम, मध्यम व अधम स्वभाव के पुरुषों के अभिनय में संकेतों का कथन ) , शिव १.२१.२८ ( उत्तम , मध्यम व अधम लिङ्गों के उच्छ्राय मानों का कथन ), २.३.५४.७२ (उत्तमा , मध्यमा , निकृष्टा व अतिनिकृष्टा पतिव्रताओं के लक्षणों का कथन ) , ५.२०.१५ ( सात्त्विक, राजसिक व तामसिक तपों के कथन के पश्चात् सात्त्विक तप को उत्तम कहना ) , ७.१४.२४ ( उत्तम, मध्यम व अधम प्रकार के जपों का कथन ) , ७.३६.२९ ( प्राणायाम के उत्तम , मध्यम व कनीयस् प्रकारों का कथन ), महाभारत उद्योग ३४.५२ (उत्तम, मध्यम व अन्त्य पुरुषों को भय के कारणों का कथन ) , १२३.१० (ययाति द्वारा उत्तम , ध्रुव , अव्यय आदि स्थान प्राप्त करने का उल्लेख ) , भीष्म ३९.१७ / भगवद्गीता १५.१७ ( क्षर व अक्षर पुरुषों  से परे पुरुषोत्तम / परमात्मा कहलाने वाले उत्तम पुरुष का कथन ) , द्रोण ९९.६ ( युद्ध में रथ शिक्षा में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उत्तम , मध्यम व अधम मण्डलों को दिखाने का उल्लेख ) , शान्ति ६२.१० ( मनुष्य द्वारा काल संचोदित होक रउत्तम , मध्यम व अधम प्रकार के कर्म करने का उल्लेख )  Uttama madhyama

 

उत्तमश्लोक भागवत १.१.१९, १.३.४०, २.१.९, २.३.१७, ४.१२.२७, ५.१.३, ५.१४.४३ , ६.२.१८ , ८.४.४ , ८.२४.३ , ९.४.२४ , ९.११.७ , १०.३८.४ , १०.४७.४८ , १०.५५.३५ , १०.६६.४३, १०.८०.२, ११.३०.३५ ( उत्तमश्लोक शब्द का श्रीकृष्ण , पुरुषोत्तम आदि के लिए प्रयोग ) 

 

 

उत्तमौजा विष्णु ३.२.२८ ( दशम ब्रह्मसावर्णि मनु के १० पुत्रों में से एक ) , शिव ५.३४.४८ ( दशम मन्वन्तर में मनु के १० पुत्रों में से एक )  Uttamaujaa

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